Germany: लंबे समय से भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। महंगी पढ़ाई, वीजा नियमों में सख्ती और विदेशी छात्रों से जुड़ी नीतियों के कारण कई भारतीय अब नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच जर्मनी तेजी से भारतीय छात्रों की पसंद बनकर उभरा है। यहां उच्च शिक्षा की गुणवत्ता अच्छी है और कई सरकारी संस्थानों में फीस दूसरे पश्चिमी देशों की तुलना में कम है। इसके अलावा मजबूत रिसर्च सिस्टम और पढ़ाई के बाद करियर के अवसर भी छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।
जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जर्मन एकेडमिक एक्सचेंज सर्विस यानी DAAD के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के विंटर सेमेस्टर में जर्मनी की यूनिवर्सिटी में करीब 69,816 भारतीय छात्र पढ़ रहे थे। इसके साथ भारतीय छात्र वहां सबसे बड़ा विदेशी छात्र समूह बन गए हैं। एक साल में भारतीय छात्रों की संख्या में करीब 17.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यानी लगभग 10,400 नए भारतीय छात्र जर्मनी पहुंचे। औसतन देखें तो हर दिन करीब 28 से 29 भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए वहां जा रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि जर्मनी अब भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पारंपरिक विकल्पों का मजबूत विकल्प बन चुका है।
जर्मनी की सबसे बड़ी ताकत उसकी उच्च शिक्षा और रिसर्च व्यवस्था है। वहां यूनिवर्सिटी का संबंध केवल कक्षाओं और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध संस्थानों और उद्योगों से भी मजबूत जुड़ाव रहता है। इंजीनियरिंग, तकनीक, विज्ञान और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में इसका फायदा छात्रों को मिलता है। जर्मनी ऑटोमोबाइल, मशीनरी, इंजीनियरिंग, केमिकल, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसलिए छात्रों को पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री का व्यावहारिक अनुभव और भविष्य के करियर की संभावनाएं भी दिखाई देती हैं।
अमेरिका में दुनिया की कई टॉप यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन वहां उच्च शिक्षा और रहने का खर्च काफी ज्यादा है। वीजा नियमों और विदेशी छात्रों से जुड़ी नीतियों में बदलाव भी छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी फीस तथा रहने का खर्च बड़ी चुनौती है, जबकि कनाडा ने विदेशी छात्रों की संख्या नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। ऐसे माहौल में जर्मनी अपेक्षाकृत किफायती विकल्प देता है। कई सरकारी विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस काफी कम है, हालांकि छात्रों को रहने, खाने, स्वास्थ्य बीमा और अन्य खर्च खुद उठाने पड़ते हैं। कुछ पाठ्यक्रमों और संस्थानों में अतिरिक्त फीस भी हो सकती है।
जर्मनी की लोकप्रियता केवल कम खर्च की वजह से नहीं है। उसकी यूनिवर्सिटीज की वैश्विक प्रतिष्ठा भी छात्रों को आकर्षित करती है। QS World University Rankings में जर्मनी के चार संस्थानों का शीर्ष 100 में शामिल होना वहां की शिक्षा व्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। तकनीकी शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में जर्मन संस्थानों की खास पहचान है। भारतीय छात्रों के लिए इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा, मशीनरी और दूसरे तकनीकी विषयों में पढ़ाई के कई अवसर मौजूद हैं। उद्योग और शोध संस्थानों के साथ मजबूत कनेक्शन छात्रों को पढ़ाई के बाद बेहतर करियर बनाने में मदद कर सकते हैं।
भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई का फैसला सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होता। पढ़ाई के बाद नौकरी और करियर की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। जर्मनी में इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और दूसरे कुशल पेशेवरों की जरूरत बनी हुई है। देश की बढ़ती उम्रदराज आबादी के कारण कई क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है। यही वजह है कि भारतीय छात्र जर्मनी को शिक्षा के साथ करियर बनाने के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। आने वाले वर्षों में अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो जर्मनी भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई के सबसे प्रमुख विकल्पों में और मजबूत जगह बना सकता है।
Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat.
International News: आजादी के 77 साल बाद भी भारत की शिक्षा प्रणाली देश की बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करने…
Please enter your username or email address to reset your password.