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सांसद एवं सपा नेता जियाउर्रहमान बर्क ने संभल बवाल में न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बवाल में जान हमारी गई और अपराधी भी हम ही साबित हो रहे हैं।
बोले, न्यायिक जांच आयोग के गठन पर उम्मीद थी कि संभल के लोगों को न्याय मिलेगा लेकिन यह उम्मीद भी टूट गई। सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार में जो भी न्यायिक जांच आयोग गठित किए जाते हैं, वह इसी तरह की गलत रिपोर्ट तैयार देते हैं।
बृहस्पतिवार को संभल में दीपा सराय स्थित अपने आवास पर सांसद बर्क ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि तब पुलिस ने गोली चलाई थी। हमारे पांच निहत्थे भाइयों की जान ली गई थी। यह जुल्म की इंतेहा है। सौ से ज्यादा निर्दोष लोग जेल भेजे गए। इन लोगाें के घरों में दूसरा कोई खाने कमाने वाला तक नहीं है।
पुलिस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ बवाल के दिन भी पूरा सिस्टम था। ड्रोन से वीडियो बन रही थी। इसके बाद भी अब तक पुलिस-प्रशासन द्वारा कोई फोटो या वीडियो ऐसा नहीं दिखाया गया है, जिसमें आम लोगों के हाथ में हथियार दिख रहा हो या कोई गोली चला रहा हो। आम लोगों के हाथ में कोई हथियार नहीं था। इसके बाद भी हमारे लोगों को ही अपराधी बना दिया गया। यह जुल्म की इंतेहा है।
रामपुर के सांसद बोले, राजनीतिक रंजिश में शामिल किए नेताओं के नाम
संभल। रामपुर के सांसद एवं सपा नेता मोहिबुल्ला नदवी ने कहा है कि सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल का नाम राजनीतिक रंजिश में शामिल किया गया है। नदवी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि संभल बवाल में पुलिस ने जो गोली चलाई थी, उसमें पांच लोगों की जान गई थी। जनप्रतिनिधियों का काम लोगों को राह दिखाना होता है किसी को उकसाना नहीं होता है।
सेवानिवृत्त लोगों ने सरकार के मन की रिपोर्ट तैयार कीः विधायक
संभल के विधायक एवं सपा नेता इकबाल महमूद का कहना है कि हम सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आयोग को न्यायिक जांच आयोग नहीं मानते हैं। यह सरकार के सेवानिवृत्त लोग थे, जिन्होंने सरकार के मन की रिपोर्ट तैयार की है।
बृहस्पतिवार को सपा विधायक ने न्यायिक जांच आयोग की सदन में पेश की गई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता मौजूदा जज द्वारा की जानी चाहिए थी। तभी पूरी घटना का सच सामने आता। उन्होंने कहा कि संभल से न हिंदुओं का पलायन हुआ और न किसी मंदिर पर कब्जा किया गया था। दो-तीन विवाद जरूर हुए हैं।
1978 के दंगे में नौ लोगों की जान गई थी। विधायक ने आगे कहा कि सीएम को भी गलत जानकारी दी गई है। वह 1978 के दंगे में बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की बात कहते हैं, जबकि उनको सदन में मेरे द्वारा ही बताया गया था कि तब नौ लोगों की जान गई थी। यदि ज्यादा लोगों की जान गई है तो सरकार साबित करे।